काशीपुर में आज कृषि विज्ञान केंद्र में एपीडा द्वारा बासमती धान में कीटनाशकों का सुरक्षित तथा न्यायपूर्ण उपयोग नामक विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान कार्यशाला में मेरठ से आये वैज्ञानिकों ने कहा कि हम खेतों में दावा का उपयोग तब करते हैं जब नुकसान हो जाता है। दवा और कीटनाशकों का प्रयोग सही समय पर किया जाना चाहिए। इस दौरान सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि एवं पौधिक विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत एवम जैविक नियंत्रण प्रयोगशाला के प्रभारी डॉ. राजेन्द्र सिंह ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य देश मे उत्पन्न बासमती चावल की फसल को कम से कम कीटनाशकों का प्रयोग करवाने के बारे में बताना है, जिससे कि ज्यादा से ज्यादा मात्रा में देश मे बासमती चावल का उत्पादन हो सके। उन्होंने कहा कि यदि देश के चावल में कीटनाशकों का ज्यादा समावेश होने पर धान बिक नहीं पायेगा। वहीं कार्यक्रम के आयोजक और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से बासमती धान का उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए और कैसे में संतुलित रूपः से कीटनाशकों का प्रयोग करें इस बारे में एपीडा के अधिकारियों के द्वारा क्षेत्र के किसानों को बताया गया है।






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