July 11, 2026

New Flow

Khabar Bina Ruke Sabse Pehle

लाल धारा कलेक्टिव: उत्तराखंड में सम्पूर्ण माहवारी स्वास्थ्य की ओर एक सार्थक पहल

Spread the love

खबर प्रवाह (NEWS FLOW) 17 जून, 2026

अल्मोड़ा, उत्तराखंड। अल्मोड़ा जिले के विभिन्न विकासखंडों में 10 से 12 जून तक आयोजित तीन दिवसीय माहवारी जागरूकता अभियान ने ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों के बीच माहवारी स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों पर सार्थक संवाद को बढ़ावा दिया। ‘लाल धारा कलेक्टिव’ नामक इस पहल का उद्देश्य माहवारी से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों, स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं, सामाजिक धारणाओं और टिकाऊ विकल्पों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

अभियान के अंतर्गत 10 जून को बाल्टा में महिलाओं के लिए, 11 जून को खेतीगांव में किशोरियों के लिए तथा 12 जून को कटरमल में महिलाओं और किशोरियों के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। तीनों स्थानों पर प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और माहवारी जैसे विषय पर खुलकर चर्चा की।

इस पहल को चार संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से साकार किया गया। सेवा (SEWA) उत्तराखंड ने अपने मजबूत सामुदायिक नेटवर्क के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक महिलाओं और किशोरियों की भागीदारी सुनिश्चित की। अश्वत्थ एजुकेशनल फाउंडेशन ने कार्यक्रम की शैक्षिक रूपरेखा तैयार करते हुए सीखने को संवादात्मक और सहभागी बनाने पर विशेष ध्यान दिया। डिजीधारा फाउंडेशन ने स्थानीय स्तर पर समन्वय, संसाधन प्रबंधन और स्वयंसेवकों के सहयोग से कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, वीमेन ऑफ उत्तराखंड (WoU) ने माहवारी और मानसिक स्वास्थ्य के संबंधों पर चर्चा को बढ़ावा दिया तथा प्रतिभागियों को पर्यावरण-अनुकूल कपड़े के पैड उपलब्ध कराए।

अभियान की सफलता में स्थानीय स्वयंसेवकों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रखर गोयल, अनन्या बैरी, नीलम भट्ट, रुग्वेद, स्वप्निल और आस्था ने विभिन्न स्तरों पर सहयोग देकर कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाई।

कार्यशालाओं में पारंपरिक व्याख्यान पद्धति के बजाय “वर्ल्ड कैफे” मॉडल का उपयोग किया गया। इस मॉडल के तहत प्रतिभागियों को छोटे समूहों में विभाजित कर चार अलग-अलग विषयगत स्टेशनों पर भेजा गया, जहाँ उन्होंने चर्चा, गतिविधियों और अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया में भाग लिया। इस पद्धति का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं था, बल्कि समुदाय के भीतर ऐसा सहयोगी वातावरण तैयार करना था जो कार्यक्रम के बाद भी बना रहे।

कार्यशाला के चार प्रमुख विषय थे— जीवविज्ञान, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सस्टेनेबिलिटी। जीवविज्ञान सत्र में प्रतिभागियों ने माहवारी के दौरान शरीर में होने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों को समझा। स्वास्थ्य सत्र में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, स्थानीय पौष्टिक आहार तथा दर्द कम करने में सहायक योगाभ्यासों पर चर्चा की गई। स्वच्छता सत्र में माहवारी से जुड़ी झिझक और सुरक्षित स्वच्छता सुविधाओं तक महिलाओं के अधिकारों पर बात हुई। वहीं सस्टेनेबिलिटी सत्र में एकल-उपयोग प्लास्टिक पैड्स के पर्यावरणीय प्रभावों पर चर्चा करते हुए कपड़े के पैड, पीरियड पैंटी, मेंस्ट्रुअल कप, मेंस्ट्रुअल डिस्क तथा अन्य टिकाऊ विकल्पों की जानकारी दी गई।

कार्यशालाओं के दौरान महिलाओं और किशोरियों ने बड़ी सहजता से अपने प्रश्न और अनुभव साझा किए। मानसिक स्वास्थ्य, मूड स्विंग्स, पोषण और वैकल्पिक माहवारी उत्पादों को लेकर विशेष रुचि देखने को मिली। कई प्रतिभागियों के लिए यह जानकारी नई थी, जिसे उन्होंने उत्साह और जिज्ञासा के साथ ग्रहण किया।

‘लाल धारा कलेक्टिव’ केवल एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि ग्रामीण समुदायों में स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ। इस पहल ने यह दिखाया कि सही जानकारी, सामुदायिक सहभागिता और खुले संवाद के माध्यम से माहवारी जैसे विषयों से जुड़ी झिझक को कम किया जा सकता है तथा महिलाओं और किशोरियों को अपने स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों के प्रति अधिक जागरूक और सक्षम बनाया जा सकता है।