वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री व उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी की प्रदेश सचिव अलका पाल ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार के हाथ किसानों के खून से रंगे हुए हैं। एक वर्ष से अधिक समय से देश का अन्नदाता किसान सड़कों पर तीन काले कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहा है लेकिन भाजपा सरकार और उसके तथाकथित नेताओं के कान पर जूं नहीं रेंग रही, जो कि अफसोस और शर्म का विषय है।
पीसीसी सचिव अलका पाल ने कहा कि विगत दिनों हरियाणा में किसानों पर भाजपा सरकार के इशारे पर की गई लाठी चार्ज से अनेकों किसानों को बुरी तरह घायल होना पड़ा। एक वर्ष से आंदोलन कर रहे किसानों के कई साथी अब इस दुनिया को त्याग चुके हैं, लेकिन भाजपा सरकार अन्नदाता को नुकसान पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही। एक वर्ष से अधिक समय से आंदोलन कर रहे किसानों से अब तक सरकार का कोई भी अधिकृत प्रतिनिधि वार्ता को आगे नहीं आया है। सरकार केवल झूठे आरोप लगाकर देश के किसानों के आंदोलन को बदनाम करने की साजिश रच रही है। कांग्रेस प्रदेश सचिव अलका पाल ने कहा कि किसानों को पूर्व में भी केंद्र सरकार की हठधर्मिता के कारण आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ा l लेकिन गूंगी- बहरी सरकार के कान पर कोई भी आवाज नहीं आती। ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र व उत्तराखंड की सरकार वास्तविकता से मुंह फेरना चाहती हैं,जिससे पूरे देश में किसान संकट लगातार बढ़ता जा रहा है lउन्होंने कहा कि गर्व का विषय होना चाहिए कि कोरोना के समय भी देश का अन्नदाता किसान ने देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का काम किया,लेकिन भाजपा सरकार ने कोरोना के बाद हरियाणा में शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे किसानों के ऊपर लाठियां बरसा कर अंग्रेजी हुकूमत की याद दिला दी। कांग्रेस नेत्री अलका पाल ने भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि वक्त से पहले केंद्र और उत्तराखंड की सरकारें होश में आ जाए, वरना देश का अन्नदाता किसान उनको सत्ता से बेदखल करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा। उन्होंने आम जनमानस का धन्यवाद देते हुए कहा कि देश के किसानों के साथ 27- सितंबर को किए गए भारत बंद अभूतपूर्व रहा। केंद्र और राज्य में बैठी सरकारों को होश आ जाना चाहिए की देश और उत्तराखंड की जनता क्या चाहती है। आगामी विधानसभा चुनाव -2022 में किसानों की हुंकार से इन सरकारों का तख्तापलट हो जाएगा।






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