खबर प्रवाह (NEWS FLOW) 03 अक्टूबर, 2025
काशीपुर में इन दिनों कांग्रेस पार्टी के भीतर उठा एक विवाद राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रदेश के पूर्व सहकारिता मंत्री और कांग्रेस पार्टी के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले स्वर्गीय चौधरी समरपाल सिंह की तस्वीर कांग्रेस नवचेतना भवन द्रोणासागर से हटाए जाने की घटना ने जाट समाज में तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है। स्वर्गीय नेता की छवि को पार्टी दफ्तर से हटाए जाने को जहां समर्थक अपमानजनक मान रहे हैं, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठजनों द्वारा इसे सफाई अभियान के दौरान हुई एक सामान्य भूल बताया जा रहा है। हालांकि इस मुद्दे ने केवल स्थानीय राजनीति में ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी उबाल ला दिया है। खासकर जाट समाज के बीच यह घटना बेहद संजीदा मानी जा रही है क्योंकि चौधरी समरपाल सिंह का नाम इस समाज की प्रतिष्ठा और कांग्रेस पार्टी की निष्ठा से हमेशा जुड़ा रहा है।
स्वर्गीय चौधरी समरपाल सिंह की पुत्री श्रीमती मुक्ता सिंह ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे कांग्रेस के कुछ नेताओं की संकीर्ण मानसिकता करार दिया। उनका कहना था कि जिन व्यक्तियों ने उनके पिता की तस्वीर कांग्रेस भवन से हटाई, वही लोग उनकी मृत्यु के समय उनके पार्थिव शरीर पर कांग्रेस का ध्वज ओढ़ाने वालों में शामिल थे। श्रीमती मुक्ता सिंह ने कहा कि उनके पिता ने अपना पूरा जीवन कांग्रेस पार्टी को समर्पित कर दिया था और प्रदेश स्तर पर संगठन को मजबूत करने में अहम योगदान दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे व्यक्ति की स्मृति को हटाने का कदम केवल अपमानजनक ही नहीं बल्कि निंदनीय भी है। इस घटना ने जाट समाज में गहरी नाराज़गी पैदा कर दी है और लोग इसे अपनी अस्मिता से जुड़ा हुआ मामला मान रहे हैं।
प्रदेश की राजनीति में चौधरी समरपाल सिंह का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता रहा है। वे न केवल पूर्व सहकारिता मंत्री रहे बल्कि इफको के वाइस चेयरमैन के पद पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके थे। इसके अलावा वे केन सोसाइटी में दो बार अध्यक्ष रहे, काशीपुर की मार्केटिंग सोसाइटी के अध्यक्ष भी बने और डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने किसानों और आम जनता की समस्याओं के समाधान में अहम योगदान दिया। इतना लंबा और प्रभावशाली राजनीतिक जीवन कांग्रेस पार्टी को समर्पित करने वाले नेता की तस्वीर का अचानक हटाया जाना उनके समर्थकों के लिए बेहद आहत करने वाला साबित हुआ है। श्रीमती मुक्ता सिंह ने इसे जाट शिरोमणि की छवि को धूमिल करने की साजिश करार दिया और कहा कि यह कार्य पार्टी के लिए शर्मनाक है।
इसी बीच कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री श्रीमती अलका पाल ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि विवाद को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भवन में सफाई अभियान के दौरान तस्वीर का हुक टूट जाने से उसे कुछ समय के लिए हटाया गया था। उनके अनुसार यह तस्वीर बाद में सम्मानपूर्वक उसी स्थान पर पुनः स्थापित कर दी गई है। श्रीमती अलका पाल ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी के हर कार्यकर्ता के दिल में चौधरी समरपाल सिंह के प्रति गहरा सम्मान है और उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से उछाला जा रहा है जबकि सच्चाई यह है कि तस्वीर हमेशा की तरह सुरक्षित और सम्मानित स्थान पर ही है।
काशीपुर में इस घटनाक्रम के बाद माहौल गरमाता हुआ दिखाई दे रहा है। एक ओर जहां जाट समाज के लोग चौधरी समरपाल सिंह के प्रति हुई इस कथित असम्मानजनक हरकत पर आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस के कुछ नेता इस पूरे मामले को गलतफहमी करार देकर शांत करने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वर्गीय समरपाल सिंह जैसे अनुभवी और जनसेवा में अग्रणी नेता के प्रति उठे विवाद ने कांग्रेस पार्टी की एकता और अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस प्रकरण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि राजनीति में संवेदनशील मुद्दों को यदि सावधानी से नहीं संभाला जाए तो वह बड़े विवाद का रूप धारण कर सकते हैं। अब यह देखना होगा कि कांग्रेस पार्टी इस विवाद को कैसे शांत करती है और जाट समाज में उत्पन्न नाराज़गी को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

सम्पादक
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