August 26, 2026

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आप नेता दीपक बाली ने मेयर ऊषा चौधरी और विधायक चीमा पर लगाया करोड़ों के घोटाले का आरोप

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आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी में आज प्रेस वार्ता के माध्यम से काशीपुर नगर निगम के मेयर और स्थानीय विधायक पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से करोड़ों रुपए के घोटाले का आरोप लगाया। करोड़ों के इस घोटाले के संबंध में प्रदेश के महामहिम राज्यपाल को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की एसआईटी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है।

काशीपुर में आम आदमी पार्टी के विधायक प्रत्याशी एवं चुनाव कैंपेन कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बाली ने आज काशीपुर रामनगर रोड स्थित आम आदमी पार्टी के कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के माध्यम से भाजपा की नगर निगम की मेयर श्रीमती उषा चौधरी एवं 20 वर्षों से भाजपा के विधायक हरभजन सिंह चीमा पर गंभीर आरोप लगाए और करोड़ों के इस घोटाले के संबंध में प्रदेश के महामहिम राज्यपाल को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की एसआईटी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। दीपक बाली ने आरोप लगाया कि विधायक और मेयर की सांठगांठ के चलते काशीपुर नगर निगम में कूड़ा निस्तारण को लेकर जो अनुबंध किए गए उनमें करोड़ों रुपए का बंदरबांट किया गया। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि आरटीआई खुलासे में जिस धर्मकांटे पर कूड़ा तोलना दर्शाया गया है वह धर्मकांटा काशीपुर क्षेत्र में है ही नहीं और ना ही शुभदर्शन नाम के इस धर्म कांटे का माप तोल कार्यालय में कोई पंजीकरण है ।

इससे भी बड़े आश्चर्य की बात है कि जिस शुभदर्शन धर्मकांटे के नाम की जो पर्ची लगाई गई है उस पर उस धर्म कांटे का कोई पता भी नहीं लिखा है कि वह है तो कहां है। 1 अप्रैल 2019 से दिए गए कूड़ा निस्तारण के ठेके की अवधि 3 वर्ष थी मगर संदिग्ध कारणों के चलते यह ठेका मात्र 17 महीने में खत्म कर दिया गया। प्रथम 1 महीने में कूड़े की जो तुलाई की गई वह आरके फ्लोर मिल नाम के धर्म कांटे से कराई गई जबकि तोल की पर्चीयां शुभदर्शन धर्म कांटे के नाम से लगाई गई। तुलाई के खर्चे के मांग पत्र में भी आरके फ्लोर मिल दर्शाया गया है जबकि पर्चियां शुभदर्शन धर्म कांटे की ही है। उन्होंने कहा कि जब उक्त काटा धर्म कांटा काशीपुर क्षेत्र में है ही नहीं तो भुगतान की भी जांच होनी चाहिए। उन्होने आरोप लगाया कि विधायक हरभजन सिंह चीमा भी चूकिं नगर निगम के पदेन सदस्य हैं और उन्हें निगम की बैठकों में जाने का पूरा अधिकार है तो क्या उनके संज्ञान में यह मामला नहीं आया होगा और यदि आया तो उन्होंने उसे क्यों दबाए रखा? उनकी खामोशी के पीछे क्या कारण रहा? 1 अप्रैल 2019 से शुरू हुए कूड़ा निस्तारण के ठेके में 17 महीने तक ओस्तन जो खर्च आया वह 42 से 69लाख रुपए प्रतिमाह तक पहुंच गया। आप प्रत्याशी दीपक बाली ने कहा कि जब वह राजनीति में आ गए तो कूड़ा निस्तारण का वही खर्च अगले अनुबंध में मात्र 26.50 लाख रुपए रह गया। इसका मतलब या तो पेट्रोल डीजल सस्ता हुआ या फिर मजदूरी सस्ती हुई अथवा काशीपुर की जनता ने कूड़ा ही डालना बंद कर दिया। अगर ऐसा नहीं है तो मेयर साहिबा बताएं कि जो कूडा पूर्व में 42 से 69 लाख रुपए प्रतिमाह तक उठाया जा रहा था वह मेरे राजनीति में आने के बाद मात्र साढे 26 लाख रूपये प्रति माह क्यों हो गया। इसका मतलब 17 माह तक जनता के खून पसीने की कमाई को दोनों हाथों से लूटा गया। उन्होंने ठेके के टेंडर पर सवाल उठाते हुए कहा कि ठेके का टेंडर करते समय जो टेंडर किया गया उसकी प्रक्रिया में शासन से नियुक्त नगर स्वास्थ्य अधिकारी को क्यों नहीं शामिल किया गया ?और उनकी जगह एक स्थानीय कर्मचारी को चार्ज देकर नगर स्वास्थ्य अधिकारी की भूमिका अदा कराई गई। कूड़ा निस्तारण की टोल की परचियों पर वाहनों के नाम तो लिखे गए हैं मगर उनके नंबर नहीं लिखे गए हैं। उन्होंने कहा कि मैं साक्ष्यों के आधार पर आरोप लगा रहा हूं और देखना अब यह है कि मेरे ऊपर विधायक या मेयर मुकदमा कराते हैं या फिर काशीपुर की जनता के हित में मुकदमा मेरे द्वारा कराया जाता है। बाली ने इस घोटाले के लिए भारतीय जनता पार्टी को भी दोषी ठहराया और कहा कि उसने भ्रष्ट लोगों को टिकट देकर जनता को लूटने के लिए छोड़ दिया लेकिन काशीपुर का दुर्भाग्य है कि यहां की जनता ने जिन्हें कुर्सी पर बैठाया था वह कूड़े में पैसा तलाश रहे हैं। शहर के विकास पर जो पैसा खर्च होता वह नेताओं ने लूट लिया और बेचारी जनता इंतजार कर रही है विकास का।

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